समंदर सारे शराब होते तो सोचो कितने फसाद होते,
हकीक़त हो जाते ख्वाब सारे तो सोचो कितने फसाद होते
किसी के दिल में क्या छुपा है बस ये खुदा ही जानता है ,
दिल अगर बे नक़ाब होते तो सोचो कितने फसाद होते
थी ख़ामोशी फितरत हमारी तभी तो बरसों निभा गई,
अगर हमारे मुंह में भी जवाब होते तो सोचो कितने फसाद होते
हम अच्छे थे पर लोगों की नज़र मे सदा रहे बुरे,
कहीं हम सच में खराब होते तो सोचो कितने फसाद होते!!
Ser-o-shayri
here we share andaj e shayrana...
Tuesday, 29 September 2015
सोचो कितने फसाद होते
लोग
अगर लोग केवल जरुरत पर
ही आपको याद करते है तो
बुरा मत मानिये बल्कि
गर्व कीजिये क्योंकि
मोमबत्ती की याद तभी आती है,
जब अंधकार होता है।"
ज़िंदगी
"मैं अपनी 'ज़िंदगी' मे हर किसी को
'अहमियत' देता हूँ...क्योंकि
जो 'अच्छे' होंगे वो 'साथ' देंगे...
और जो 'बुरे' होंगे वो 'सबक' देंगे!!
ज़हर
खाने में कोई 'ज़हर' घोल दे तो
एक बार उसका 'इलाज' है..
लेकिन 'कान' में कोई 'ज़हर' घोल दे तो,
उसका कोई 'इलाज' नहीं है।
मित्र
आइना और परछाई के
जैसे मित्र रखो क्योकि
आइना कभी झूठ नही बोलता
और परछाई कभी साथ नही छोङती......
इंसान
सड़क कितनी भी साफ हो
"धुल" तो हो ही जाती है,
इंसान कितना भी अच्छा हो
"भूल" तो हो ही जाती है!!!
रिश्ता
"रिश्ता" दिल से होना चाहिए,
शब्दों से नहीं,
"नाराजगी" शब्दों में होनी चाहिए
दिल में नहीं!
Subscribe to:
Posts (Atom)